साँवरे की बावरी

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जीवन यात्रा में मैं से बावरी तक का सफ़र —
जब हम प्रभु की तरफ़ एक कदम बढ़ाते हैं, तो प्रभु हमारी तरफ़ हज़ार कदम बढ़ाते हैं। जिसे ठाकुर जी स्वयं अपनी लीला एवं संकेतों के माध्यम से हमारा पथ प्रशस्त करते हैं। और जब पूर्ण समर्पण हो जाता है, तो उस दिव्य आनंद से सराबोर कर देते हैं, जिससे ये मन बावरा हो जाता है। और हर तरफ़ बस हमारे प्राणधन (ठाकुर जी) नज़र आते हैं। इस परम आनंद की अनुभूति ईश्वर के चरणों में निःस्वार्थ प्रेम के फलस्वरूप होती है।

Description

जीवन यात्रा में मैं से बावरी तक का सफ़र —
जब हम प्रभु की तरफ़ एक कदम बढ़ाते हैं, तो प्रभु हमारी तरफ़ हज़ार कदम बढ़ाते हैं। जिसे ठाकुर जी स्वयं अपनी लीला एवं संकेतों के माध्यम से हमारा पथ प्रशस्त करते हैं। और जब पूर्ण समर्पण हो जाता है, तो उस दिव्य आनंद से सराबोर कर देते हैं, जिससे ये मन बावरा हो जाता है। और हर तरफ़ बस हमारे प्राणधन (ठाकुर जी) नज़र आते हैं। इस परम आनंद की अनुभूति ईश्वर के चरणों में निःस्वार्थ प्रेम के फलस्वरूप होती है।

Book Details

Available Format

Paperback Print

ISBN

9789374265277

Language

Hindi

Page Count

52

Published Year

2025

Size

5×8 in

Author

Dr. Manisha Singh

Publisher

OrangeBooks Publication

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