कायस्थ विरासत (Kayasth Virasat)

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इस पुस्तक की यात्रा भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के दिव्य स्वरूप से आरंभ होकर उनके वंश, धाम, सांस्कृतिक विरासत और कायस्थ समाज की ऐतिहासिक चेतना तक पहुँचती है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ या वंशावली का संकलन नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा है जो हमें हमारे मूल से जोड़ती है।

Description

इस पुस्तक की यात्रा भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के दिव्य स्वरूप से आरंभ होकर उनके वंश, धाम, सांस्कृतिक विरासत और कायस्थ समाज की ऐतिहासिक चेतना तक पहुँचती है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ या वंशावली का संकलन नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा है जो हमें हमारे मूल से जोड़ती है।
चित्रगुप्त महाराज न्याय, सत्य, लेखा और उत्तरदायित्व के प्रतीक हैं। उनके जीवन और वंश की गाथाएँ हमें यह स्मरण कराती हैं कि मनुष्य का प्रत्येक कर्म महत्वपूर्ण है। यह संसार केवल दृश्य घटनाओं से नहीं चलता, बल्कि अदृश्य नैतिक व्यवस्था से संचालित होता है। यही व्यवस्था चित्रगुप्त जी के स्वरूप में साकार होती है।
इस पुस्तक में वर्णित ऐरावती और सूर्यदक्षिणा की मातृशक्ति, विभिन्न वंशों की संघर्षगाथाएँ, चारों धामों की आध्यात्मिक महत्ता, तथा शास्त्रों में अम्बष्ठ और कायस्थ परंपरा का उल्लेख — ये सब मिलकर एक समग्र दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। यह दृष्टि बताती है कि इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि मूल्यों की निरंतरता है।
आज के युग में, जब मनुष्य तकनीक और भौतिक प्रगति के शिखर पर पहुँच चुका है, तब भी उसे नैतिकता, सत्यनिष्ठा और आत्मावलोकन की आवश्यकता पहले से अधिक है। चित्रगुप्त जी की अवधारणा हमें यही सिखाती है कि जीवन का सच्चा मूल्य बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अंत:करण की पवित्रता और कर्मों की शुद्धता में है।
यह कृति पूर्णतः अंतिम सत्य का दावा नहीं करती, बल्कि यह एक विनम्र प्रयास है— श्रद्धा, अध्ययन और उपलब्ध संदर्भों के आधार पर एक समन्वित प्रस्तुति देने का। यदि यह पुस्तक पाठकों में अपने इतिहास के प्रति जिज्ञासा, अपने धर्म के प्रति आस्था, और अपने कर्मों के प्रति सजगता उत्पन्न कर सके, तो इसका उद्देश्य सफल माना जाएगा।
अंततः, भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज की वंदना के साथ यही कामना है कि वे हम सबको सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें, हमारे कर्मों को धर्ममय बनाएं और समाज में न्याय तथा नैतिकता की ज्योति सदैव प्रज्वलित रखें।
॥ जय श्री चित्रगुप्त महाराज ॥

Book Details

Available Format

Paperback Print

ISBN

9789374262917

Language

Hindi

Page Count

140

Published Year

2026

Size

5×8 in

Author

Jitendra Kumar Sinha

Publisher

OrangeBooks Publication

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